हम वो हैं

हम वो हैं जो खुदा को भूल गये, तू मिरी जान किस गुमान में है..?

हमसे मुकम्मल हुई

हमसे मुकम्मल हुई ना कभी, ए जिन्दगी तालीम तेरी…। शागिर्द कभी हम बन न सके, और उस्ताद तूने बनने ना दिया ।।

कदर होती है

कदर होती है इंसान की जरुरत पड़ने पर ही. बिना जरुरत के तो हीरे भी तिजोरी में रहते है |

हमारी उनसे ऐसे भी

हमारी उनसे ऐसे भी होती हैं बातें.. ना वो बोलते हैं ना हम बोलते हैं….!

याद करते हो

याद करते हो मगर ज़ाहिर नहीं करते, कितना डरते हो तुम अपने आप से !!

मेरी खामोसी देखकर

मेरी खामोसी देखकर मुझसे ये ज़माना बोला तेरी संजीदगी बताती हे तुझे हँसने का शौक़ रहा होगा कभी..!!

ये जो मेरे हालात है

ये जो मेरे हालात है वो सुधर जायेंगे.. लेकिन तब तक कई लोग मेरी नज़र से उतर जायेंगे ।

उम्र भर की

उम्र भर की बात बिगड़ी इक ज़रा सी बात में.. एक लम्हा ज़िंदगी भर की कमाई खा गया

इक तमन्ना के लिए

इक तमन्ना के लिए फिरती है सहरा सहरा, ज़िंदगी रोज़ कोई ख़्वाब नया लिखती है…

हुआ मैं जब से

हुआ मैं जब से अपने सच से वाक़िफ तभी से खुद को झूठा लग रहा हूँ ।