शायद वक्त का

शायद वक्त का मजाक था या मेरी बदनसीबी….तेरी कुछ बातों को मैं मोहब्बत समझ बैठा|

तुम्हें ख़बर नहीं है

तुम्हें ख़बर नहीं है तुम्हें सोचने की ख़ातिर बहुत से काम हम कल पर छोड़ देते है|

आओ कभी यूँ

आओ कभी यूँ भी मेरे पास कि, आने में .. लम्हा और जाने में ज़िन्दगी गुज़र जाए !!!!

सुना है लोग

सुना है लोग अफ़सोस से कहते है की कोई किसीका नहीं, लेकिन कोई यह नहीं सोचता की हम किसके हुए !

सिर्फ साँसों का

सिर्फ साँसों का चलने का नाम ही जिंदगी है, तो मेरा नाम भी जीने वालों में लिखना !!

आओ कभी यूँ भी

आओ कभी यूँ भी मेरे पास कि, आने में .. लम्हा और जाने में ज़िन्दगी गुज़र जाए !!!!

कोशिश बहुत की

कोशिश बहुत की के राज़-ए-मौहब्बत बयाँ न हो !! पर मुमकिन कहां है के आग लगे और धुआँ न हो ।

दिल मे मोहब्बत

दिल मे मोहब्बत तो हम दोनो के बराबर रही… लेकिन,मैने छुपाया नही और तूंने बताया नही|

मुस्कुराकर फैर ली

मुस्कुराकर फैर ली उसने नज़र, रस्मे उल्फ़त यूँ निभाई और बस।

ख़ामोशियाँ जब चीखने लगें..

ख़ामोशियाँ जब चीखने लगें.. तो समझो ज़िंदगी रक़ीब हो चली है ख़ुद की..