मुझे कुछ लिखना

मुझे कुछ लिखना नही आता बस कुछ शब्दों को संजोकर एक ही नाम लिखना आता है|

रोते-रोते थक कर

रोते-रोते थक कर जैसे कोई बच्चा सो जाता है.. हाल हमारे दिल का अक्सर कुछ ऐसा ही हो जाता है|

तुम में और आइने में

तुम में और आइने में कोई फर्क नहीं जो सामने आया तुम उसी के हो गए !

एक तेरे बगेर ही

एक तेरे बगेर ही ना गुजरेगी ये जिंदगी बता मै क्या करू सारे ज़माने की मोहब्बत ले कर।

ये सर्द शामे

ये सर्द शामे भी किस कदर जालिम हैं, बेशक सर्द हैं फिर भी इनमें दिल सुलगता है|

जागना भी कुबूल है

जागना भी कुबूल है तेरी यादों में रातभर, तेरे अहेसासों में जो सुकून है वो नींद में कहाँ !!

पता है तुम्हारी

पता है तुम्हारी और मेरी, मुस्कान मे क्या फर्क है , तुम खुस होकर मुस्कुराते हो, हम तुम्हे खुस देखकर मुस्कुराते है..

एक वक़्त था

एक वक़्त था के वक़्त ही वक़्त था अब वक़्त है वक़्त ही नहीं मिलता।

दिल समझे थे

दिल समझे थे जिसे हम वो कमबख़्त… गोश्त का धड़कता टुकड़ा निकला|

बताओ और क्या

बताओ और क्या तब्दील करूं मैं खुद को… कशमकश को कश में बदल दिया मैंने…