अगर फुर्सत के लम्हों मे

अगर फुर्सत के लम्हों मे आप मुझे याद करते हो तो अब मत करना.. क्योकि मे तन्हा जरूर हुँ, मगर फिजूल बिल्कुल नही…

वो रूह में

वो रूह में उतर जाये तो पा ले मुझको इश्क़ के सौदे मैं जिस्म नहीं तौले जाते|

बात हुई थी

बात हुई थी समंदर के किनारे किनारे चलने की.. बातों बातों में निगाहों के समंदर में डूब गए..

अब कहां दुआओं में

अब कहां दुआओं में वो बरकतें,…वो नसीहतें …वो हिदायतें, अब तो बस जरूरतों का जुलुस हैं …मतलबों के सलाम हैं

बड़ा मुश्किल है..

बड़ा मुश्किल है..जज़्बातो को पन्नो पर उतारना.. हर दर्द महसूस करना पड़ता है..लिखने से पहले..

कितने बरसों का सफर

कितने बरसों का सफर यूँ ही ख़ाक हुआ। जब उन्होंने कहा “कहो..कैसे आना हुआ ?”

मेरी खमोशियो के राज़

मेरी खमोशियो के राज़ ख़ुद मुझे ही नहीं मालूम… जाने क्यू लोग मुझे मगरूर समझते है…

दो कदम चलकर

दो कदम चलकर अक्सर हम रुक जाया करते है , क्यों इंतजार रहता है उनका, जो राह में छोड़कर चले जाया करते है|

अगर देखनी है

अगर देखनी है कयामत तो चले आओ हमारी महफिल मे सुना है आज की महफिल मे वो बेनकाब आ रहे हैँ|

उसे मिल गए

उसे मिल गए उसकी बराबरी के लोग मेरी गरीबी मेरी मोहब्बत की कातिल निकली |