अपने वजूद पर

अपने वजूद पर, इतना न इतरा ए ज़िन्दगी, वो तो मौत है, जो तुझे मोहलत देती जा रही है…..

मेरे दिल की कभी

मेरे दिल की कभी धड़कन को समझो या ना समझो तुम.. मैं लिखता हूँ मोहब्बत पे तो इकलौती वजह हो तुम..तुम|

तुमने उम्मीद दी

तुमने उम्मीद दी मैंने उम्मीद की हम दोनों यूं ही नदी के दो किनारों की तरह चलते रहे जीवन तक……

रिश्ते की गहराई

रिश्ते की गहराई अल्फाजो से मत नापो.. *सिर्फ एक सवाल सारे धागे तोड़ जाता है…!

भूल ही गये होंगे

भूल ही गये होंगे वो मुझे, वरना इतने दिन तक कोई नाराज़ तो नहीँ रहता।।

तुम्हे खो के ही तो समझ में

तुम्हे खो के ही तो समझ में आया, क्या हमको पाना था जो ना पाया।।

चले जाने दो

चले जाने दो उसे किसी ओर कि बाहों मे, इतनी चाहत के बाद जो मेरा ना हुआ वो किसी ओर का क्या होगा।।

इश्क तुझ से

इश्क तुझ से बुरा नहीं कोई, हर भले का बुरा किया है तूने।।

हजारों महफिलें है

हजारों महफिलें है और लाखों मेले हैं, पर जहां तुम नहीं वहाँ हम अकेले हैं|

तुम सामने बैठी रहो

तुम सामने बैठी रहो,तुम्हारा हुस्न पिता रहूं,मौत जो आ गयी दरमियाँ,मरकर भी जीता रहूं|