धुले नहीं दाग खून के

धुले नहीं दाग खून के और हमे बद्दुआ देने चले आए है।

गीली आँखों का दर्द

गीली आँखों का दर्द कुछ ख़फ़ा सा है… — — ये जो सीने में धड़कता है बेवफ़ा सा है…

आहिस्ता बोलने का

आहिस्ता बोलने का उनका अंदाज़ भी कमाल था.. कानो ने कुछ सुना नही और दिल सब समझ गया..

कहने को ज़िन्दगी

कहने को ज़िन्दगी थी बहुत मुख़्तसर मगर..! कुछ यूँ बसर हुई कि ख़ुदा याद आ गया…!!

एक उम्र है

एक उम्र है जो तेरे बगैर गुजारनी है., और एक लम्हा है जो तेरे बगैर गुजरता नहीं……….

अमल से ज़िंदगी

अमल से ज़िंदगी बनती है जन्नत भी जहन्नम भी ये ख़ाकी अपनी फ़ितरत में न नूरी है न नारी है|

नजर के सिवा

अक्ल के पास खबर के सिवा कुछ भी नही ।तेरा इलाज नजर के सिवा कुछ भी नही।

थी विरह की रात

थी विरह की रात वो और दर्द बेशुमार था…!!! . . रोते रोते हँस दिया न जाने कैसा प्यार था…!!!

इश्क़ नाजुक है

इश्क़ नाजुक है बहुत अक्ल का बोझ उठा नहीं सकता|

नाउम्मीदी में बिखर जाओ

नाउम्मीदी में बिखर जाओ तो बटोर लो खुद को कि अँधेरी रात के हिस्से में भी एक चाँद होता है।