मेरे क़ाबू में

मेरे क़ाबू में न पहरों दिले-नाशाद आया, वो मेरा भूलने वाला जो मुझे याद आया।

क्यूँ नहीं महसूस होती

क्यूँ नहीं महसूस होती उसे मेरी तकलीफ, जो कहते थे बहुत अच्छे से जानते हैं तुझे।

अभी कमसिन हैं

अभी कमसिन हैं जिदें भी हैं निराली उनकी, इसपे मचले हैं हम कि दर्द-ए-जिगर देखेंगे।

ज़िन्दगी ये चाहती है

ज़िन्दगी ये चाहती है कि ख़ुदकुशी कर लूँ, मैं इस इन्तज़ार में हूँ कि कोई हादसा हो जाए।

बस दिलों को

बस दिलों को जीतना ही मकसद रखना दोस्तों, वरना दुनिया जीतकर तो सिकंदर भी खाली हाथ ही गया…..

खुद को भी

खुद को भी कभी महसूस कर लिया करो यारों कुछ रौनकें खुद से भी हुआ करती हैं.!!

सुकून और इश्क

सुकून और इश्क वो भी दोनों एक साथ !! रहने दो जी, कोई अक्ल की बात करो ।।

भूल न जाऊं

भूल न जाऊं माँगना उसे हर नमाज़ के बाद, यही सोच कर हमने नाम उसका दुआ रक्खा है।

तुम जो ये ख्वाब

तुम जो ये ख्वाब साथ लिए सोते हो,यही तो इश्क़ है|

इनसान बनने की फुर्सत

इनसान बनने की फुर्सत ही नहीं मिलती, आदमी मसरूफ है इतना, ख़ुदा बनने में…!