ये दुनिया बहुत

ये दुनिया बहुत बे-रहम है दोस्तो… तकलीफ देकर खुशी भी मना लेती है…

तेरे मैखाने का

तेरे मैखाने का दस्तूर भी अजीब है साकी शराब उनको मिलती है …जिनको पीना नहीं आता…

मेरे चेहरे सा

मेरे चेहरे सा ना अंदाज लगा कि ये उम्र… मुझ पर बीती है बहुत,मैंने गुज़ारी कम है..!!

शाम ढलने के लिए

शाम ढलने के लिए रोज सुबह सजते है , वक्त की मेज पे हम दर्द के गुलदस्ते है|

तेरे पास जब

तेरे पास जब भी रहा हुँ …अक्सर ये हुआ है , होठों ने तुझे देखा …और आँखों ने छुआ है|

ज़हर लगते हो

ज़हर लगते हो तुम मुझे… जी करता है खा कर मर जाऊ |

कुएं के पेहरेदारो को

कुएं के पेहरेदारो को अपनी प्यास मत दिखा, खुदा का नाम ले पानी तेरी ठोकर से निकलेगा|

दाग दुशमन से

दाग दुशमन से भी झुककर मिलिए कुछ अजीब चीज है मिलनसारी|

मैं वो अदना पेड़ हूँ

मैं वो अदना पेड़ हूँ, जो है शुष्क नितांत। भीतर से हारा हुआ, मनोभाव से शांत।।

जीवन जीना हो तो

जीवन जीना हो तो दर्पण की तरह जीओ, जिसमें स्वागत सभी का हो लेकिन संग्रह किसी का भी नहीं.