दीवाना पूछता है

दीवाना पूछता है ये लहरों से बार-बार… कुछ बस्तियाँ यहाँ थीं बताओ किधर गईं…!!!

सोचता तक नहीं हूँ

सोचता तक नहीं हूँ यारा कभी, मेरे मुकद्दर मै क्या क्या है मुस्करा कर मुलाकात करता हूँ वक्त के हर एक लम्हे से|

नाराज होकर छोड़कर

नाराज होकर छोड़कर जाने वाला वापास आ सकता है लेकिन मुस्करा कर छोड़कर जाने वाला वापस नही आता

काश मोहब्बत के

काश मोहब्बत के भी इलैक्शन होते हम भी कुछ खर्चा करके जीत लेते उसको…

खुशी से गुजार दे

दिल दे तो इस मिजाज का परवरदिगार दे, जो रंज की घड़ी भी खुशी से गुजार दे।

हर घड़ी ख़ुद से

हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समंदर मेरा एक से हो गए मौसमों के चेहरे सारे मेरी आँखों से कहीं खो गया मंज़र मेरा किससे पूछूँ कि कहाँ गुम हूँ बरसों से हर जगह ढूँढता फिरता है मुझे घर मेरा मुद्दतें बीत गईं इक ख़्वाब सुहाना […]

आज‬ एक ‪दुश्मन‬ ने

आज‬ एक ‪दुश्मन‬ ने ‪धीरे‬ से ‪‎कान‬ में कहा, यार ‪इतना‬ मत मुस्कुराया‬ कर ‪‎बहोत‬ जलन ‪होती‬ है !!

हम आईना हैं

हम आईना हैं, ……. आईना ही रहेंगे,….. फ़िक्र वो करें, ……. जिनकी शक्ल में कुछ …… और दिल में कुछ और है…

रोज़ आ जाते हो

रोज़ आ जाते हो बिना इत्तेला दिए ख्वाबों में…. कोई देख लेगा तो हम क्या जवाब देंगे……

सख़्त हाथों से

सख़्त हाथों से भी…. छूट जाती हैं कभी उंगलियाँ…. रिश्ते ज़ोर से नहीं…. तमीज़ से थामे जाते हैं…