बहुत अजीब हैं

बहुत अजीब हैं ये बंदिशें मोहब्बत की… कोई किसी को टूट कर चाहता है, और कोई किसी को चाह कर टूट जाता है..!!

हंसने की दुआ दी है …

ये कैसी कसक बांके मेरे दिल को लगा दी है मैंने रो रो कर तुम्हे हंसने की दुआ दी है …

मैं इस तलाश में

मैं इस तलाश में बरसों से सो नहीं पाया के मेरी नींद न जाने कहाँ पे रखी है|

एक फूल अजीब था

एक फूल अजीब था, कभी हमारे भी बहुत करीब था, जब हम चाहने लगे उसे, तो पता चला वो किसी दूसरे का नसीब था|

बहुत दिनों से

बहुत दिनों से जिन्हें ओढ़ा नहीं है कल उन रिश्तों को धूप दिखाने का मन है…

कुछ दरमियाँ नहीं

कुछ दरमियाँ नहीं है गर तेरे मेरे तो ये बेचैनियाँ क्यूँ हैं? लौट आओ कि कुछ रिश्ते बेरुखी से भी नहीं टूटा करते|

कभी टूटा नहीं

कभी टूटा नहीं दिल से तेरी याद का रिश्ता, गुफ्तगू हो न हो ख्याल तेरा ही रहता है !!

बस एक शख्स

बस एक शख्स मेरे दिल की जिद है, ना उससे ज्यादा चाहिए ना कोई और चाहिए !!

मेरी तमाम उलझने

मेरी तमाम उलझने सुलझ जाती हैं…!जब तेरी उँगलियाँ मेरी उँगलियों में उलझ जाती हैं…!!

इंसान अगर ज्यादा मजबूत हो

इंसान अगर ज्यादा मजबूत हो जाये, तो रिश्ते कमजोर पड़ जाते है।