मेरी खामोसी देखकर

मेरी खामोसी देखकर मुझसे ये ज़माना बोला तेरी संजीदगी बताती हे तुझे हँसने का शौक़ रहा होगा कभी..!!

इक तमन्ना के लिए

इक तमन्ना के लिए फिरती है सहरा सहरा, ज़िंदगी रोज़ कोई ख़्वाब नया लिखती है…

सिर्फ मोहब्बत ही

सिर्फ मोहब्बत ही ऐसा खेल है.. जो सिख जाता है वही हार जाता है..

ज़ख़्म दे कर

ज़ख़्म दे कर ना पूछा करो, दर्द की शिद्दत, दर्द तो दर्द होता हैं, थोड़ा क्या, ज्यादा क्या !!

अब हर कोई

अब हर कोई हमें आपका आशिक़ कह के बुलाता है इश्क़ नहीं न सही मुझे मेरा वजूद तो वापिस कीजिए ।

किसे मालूम था

किसे मालूम था इश्क इस क़दर लाचार करता है, दिल उसे जानता है बेवफा मगर प्यार करता है…

वो जान गयी थी

वो जान गयी थी हमें दर्द में मुस्कराने की आदत हैं वो नया जख्म दे गई मेरी ख़ुशी के लिए…

मोहब्बत बुरी है…

मोहब्बत बुरी है… बुरी है मोहब्बत, कहे जा रहे है… किये जा रहे है…

छुपे छुपे से रहते हैं

छुपे छुपे से रहते हैं सरेआम नहीं हुआ करते, कुछ रिश्ते बस एहसास होते हैं उनके नाम नहीं हुआ करते…..

कैसे लिखूं अपने

कैसे लिखूं अपने जज्बातों को मैं, दिल अब उस मुकाम पर है , कि … अश्कों की रौशनाई सूख ही गयी है