कोई चुरा ना पाये

हँसी आपकी कोई चुरा ना पाये; कभी कोई आपको रुला ना पाये; खुशियों के ऐसे दीप जले ज़िंदगी में; कि कोई तूफ़ान भी उसे बुझा ना पाये।

याद रखते हैं

याद रखते हैं हम आज भी उन्हें पहले की तरह…कौन कहता है फासले मोहब्बत की याद मिटा देते हैं।

आईना होजाये

आईना होजाये मेरा इश्क़, उनके हुस्न का …. क्या मज़ा हो दर्द,अगर खुद ही दवा लेने लगे…

तराजू मोहब्बत का

तराजू मोहब्बत का था बेवफाई भारी पड गयी|

आप ने तीर चलाया

आप ने तीर चलाया तो कोई बात न थी… ज़ख्म मैंने जो दिखाया तो बुरा मान गए…

तुम रख ही ना सकीं

तुम रख ही ना सकीं मेरा तोफहा सम्भालकर मैंने दी थी तुम्हे,जिस्म से रूह निकालकर

कोई मरहम लगाने वाला

कोई मरहम लगाने वाला नहीं था … और जख्म जल्दी भर गये ..

बहुत ढूंढने पर

बहुत ढूंढने पर भी अब शब्द नही मिलते अक्सर…. अहसासों को शायद पनाह क़लम की अब गंवारा नही…

जिसके बगैर एक

जिसके बगैर एक पल भी गुज़ारा नही होता सितम देखिये वही शख्स हमारा नही होता

कमाल हासिल है

हमको कमाल हासिल है ग़म से खुशियाँ निचोड़ लेते हैं|