तुम्हें ख़बर नहीं है

तुम्हें ख़बर नहीं है तुम्हें सोचने की ख़ातिर बहुत से काम हम कल पर छोड़ देते है|

कोशिश बहुत की

कोशिश बहुत की के राज़-ए-मौहब्बत बयाँ न हो !! पर मुमकिन कहां है के आग लगे और धुआँ न हो ।

दिल मे मोहब्बत

दिल मे मोहब्बत तो हम दोनो के बराबर रही… लेकिन,मैने छुपाया नही और तूंने बताया नही|

मुस्कुराकर फैर ली

मुस्कुराकर फैर ली उसने नज़र, रस्मे उल्फ़त यूँ निभाई और बस।

हमे कहां मालूम था

हमे कहां मालूम था कि इश्क होता क्या है…? बस…. एक ‘तुम’ मिली और जिन्दगी…. मोहब्बत बन गई|

मै रंग हुँ

मै रंग हुँ तेरे चेहरे का…. जितना तू खुश रहेगा उतना ही मै निखरती जाऊँगी.!!

आज एक दुश्मन ने

आज एक दुश्मन ने धीरे से कान में कहा.. यार इतना मत मुस्कुराया कर , बुहत जलन होती है ..!!

हमको महसूस किया

हमको महसूस किया जायेगा खुशबु की तरह …. हम कोई शोर नहीं जो सुनाई देंगे !!

मेला लग जायेगा

मेला लग जायेगा उस दिन शमशान में…जिस दिन में चला जाऊंगा आसमान में….!!

एहसान जताने का

एहसान जताने का हक भी हमने दिया उन्हे साहिब, और करते भी तो क्या करते,प्यार था हमारा कैदी नहीं था…