देखते हैं मेरा

देखते हैं मेरा बुढ़ापा किस के हिस्से में पड़े, मेरे बच्चे कर रहे हैं घर के बटवारे की बात…

अदा-ए-मोहब्बत

अदा-ए-मोहब्बत सजदा-ए-इश्क, नाम कुछ भी हो… मतलब तुम्ही से है|

चलो कायनात बांट लेते हैं

चलो कायनात बांट लेते हैं…. तुम अगले जन्म मेरी, मै जन्मों जन्म तुम्हारा|

वो बोले कुछ

वो बोले कुछ बदल रहा है हमारे बीच उनकी तरफ़ देखा मैंने और कुछ लफ्ज़; ज़ुबां पर आते-आते रह गए |

उसे मिल गए

उसे मिल गए उसकी बराबरी के लोग मेरी गरीबी मेरी मोहब्बत की कातिल निकली |

मज़े दोनो बराबर ले

मज़े दोनो बराबर ले रहे है… कभी मैं जिंदगी के, कभी जिंदगी मेरे..

तुम हो मुस्कान

तुम हो मुस्कान लबों की…. बाकी ज़िन्दगी खाली-ख़ाली…!!

तहजीब की मिसाल

तहजीब की मिसाल गरीबो के घर में हैं …. दुपट्टा भले ही फटा हुआ हो, मगर होता उनके सर पे हें !!

तुम्हारी मुस्कान से

तुम्हारी मुस्कान से सुधर जाती है तबियत मेरी…. तुम इश्क़ करते हो या इलाज करते हो….!!

न कोई फिकर

न कोई फिकर, न कोई चाह हम तो बड़े बेपरवाह है उम्र फकीराना गुजरी है हम तो ऐसे शहंसाह है|